चंद्रग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यह समय नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित माना जाता है।
हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जो विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकता है।
इसलिए शास्त्रों और परंपराओं में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियाँ अपनाने की सलाह दी जाती है, जिससे वे स्वयं और अपने गर्भस्थ शिशु की रक्षा कर सकें।
7 सितम्बर 2025 को लगने वाला चंद्रग्रहण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन दोपहर 12:57 बजे से सूतक काल प्रारंभ होगा और रात 9:58 बजे से लेकर 1:26 बजे तक ग्रहण रहेगा। ऐसे समय में गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह जानना अत्यंत आवश्यक है। आइये जानते हैं विस्तार से।
गर्भवती महिलाओं को चंद्रग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए?
चंद्रग्रहण शुरू होने से पहले घर के सभी दरवाज़ों और खिड़कियों को पर्दे या अखबार से ढक देना चाहिए।
ग्रहण के समय मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए ध्यान लगाना और मंत्रों (जैसे महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र) का जाप करना शुभ माना जाता है।
ग्रहण शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद स्नान करना आवश्यक माना जाता है।
इस समय श्रीमद्भगवद्गीता, सुंदरकांड या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी किया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं को चंद्रग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के समय की ऊर्जा भ्रूण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए घर के अंदर ही रहें।
कैंची, सुई, चाकू, ब्लेड आदि का इस्तेमाल न करें, क्योंकि मान्यता है कि इससे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
इस समय चूड़ी, पिन, सेफ्टी पिन या कोई अन्य धातु से बनी वस्तु पहनने से बचें।
ग्रहण के समय न सोएं ,आप आराम कर सकती हैं।
गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान क्या खाएं
आमतौर पर ग्रहण के समय भोजन करना वर्जित होता है,
लेकिन गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य कारणों से ताज़े फल, सात्विक भोजन और आवश्यक दवाइयाँ ले सकती हैं।
पहले से बना खाना ग्रहण से पहले हटा लें और बाद में ताज़ा बनाएं।
