जुन्नारदेव | नगर की श्री रामलीला के दूसरे दिन की लीला में भगवान श्री विष्णु ने रघुवंश शिरोमणि राजा दशरथ के घर में श्रीराम के रूप में जन्म लिया। इससे पहले राजा दशरथ के संतानहीन होने का अवसाद को जानकर कुलगुरु वशिष्ठ के द्वारा उन्हें पुत्रेष्ठी यज्ञ किए जाने की सलाह दी जाती है। इस हेतु वह ऋषि श्रृंगी के पास जा पहुंचते हैं। यज्ञ के उपरांत राम जी के जन्म लेते ही अयोध्या में उल्लास और उत्साह का वातावरण व्याप्त हो गया।

अयोध्या जी राजा दशरथ के इन चारों पुत्र का लालन पोषण धीरे-धीरे होता चला गया और फिर वह किशोर अवस्था को प्राप्त हुए। इसी लीला में मुनिवर ऋषि विश्वामित्र अयोध्या जा पहुंचते हैं। वन में अपनी दैनिक पूजन अर्चन और तपस्या में राक्षसगण बाधा बन गए थे। वह इन साधु संत ऋषि मुनि के यज्ञ और पूजन को उलट-पुलट कर रहे थे। ऋषि विश्वामित्र अपनी इस समस्या का समाधान लेकर अयोध्या नरेश राजा दशरथ के पास जा पहुंचते हैं और उनसे उनके दो पुत्र राम और लखन की मांग करते हैं। पुत्र मोह में राजा दशरथ ऐसा करने से जब इनकार कर देते हैं तो ऋषि विश्वामित्र क्रोधित हो जाते हैं, फिर कुलगुरु वशिष्ठ के समझाइश इस पर राजा दशरथ राम और लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ वह वन की ओर भेज देते हैं। जहां पर वह राक्षसराज सुबाहु और मारीच सहित ताड़का का वध कर देते हैं। इसके पश्चात इसी लीला में देवी अहिल्या के उद्धार की लीला का भी मंचन किया गया।
यहीं पर उन्हें मिथिला नरेश राजा जनक का निमंत्रण प्राप्त होता है और इसके पश्चात विश्वामित्र राम लक्ष्मण के साथ जनकपुरी की ओर रवाना हो जाते हैं। बीती रात को संपन्न हुई इस लीला में पंडित अनुरूप शर्मा (श्रीराम), पंडित शैलेंद्र मिंटू शर्मा (लक्ष्मण), तरुण बत्रा (राजा दशरथ), मुकेश विश्वकर्मा (गुरु वशिष्ठ), धर्मेंद्र मालवीय (ऋषि विश्वामित्र), दिव्यांश मालवीय (ऋषि श्रृंगी), संजय बंदेवार (सुबाहु), अश्विन विश्वकर्मा (मारीच), देवी अहिल्या (बलवीर) के द्वारा अपनी इन भूमिकाओं का सजीव एवं जीवंत अभिनय किया गया।
श्रीराम जन्म पर उमडे भक्तगण, मन्नत पूरी होने पर पालने में झुलाए गए बच्चे
बीते 99 वर्ष की श्री रामलीला की परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण दिवस श्री राम जन्म की लीला का ही रहता है। यहां की प्राचीन मान्यता है कि भगवान श्री राम जन्म दिवस के अवसर पर यहां किसी भी नवयुगल दंपत्ति के द्वारा संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी जाती है, जिसे श्री रामलीला समिति के एक विशेष पुस्तक में दर्ज किया जाता है, जो निश्चित रूप से आगामी वर्षों में पूरी हो जाती है।
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फिर वही नवयुगल अपने जन्म लिए नवजात बच्चे को श्री राम जन्म की लीला के दौरान आयोजन समिति के द्वारा लगाए गए पालने में झुलाया जाता है। जहां पर मांगी गई मन्नत के अनुसार धनराशि एवं प्रसाद का वितरण भी किया जाता है। बीती रात्रि को श्री राम जन्म की इसी लीला के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे ही नवयुगल अपने नवजात बच्चे एवं परिजनों के साथ बड़ी संख्या में दिखाई दिए।

